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हेलो दोस्तो अपने कभी न कभी झूले पर तो जरूर झूला होगा और झूलने के बाद आपको चक्कर की शिकयत होती होगी लेकिन क्या अपने ध्यान दिया कि झूलने के बाद आकिर चक्कर आते ही क्यो है आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चक्कर आने के पीछे हमारे कानो से भी सम्बन्ध होता है हमारे कान सुनने के अलावा हमारे शरीर को संतुलन बनाये रखने में भी सहायक होते है
आकिर चक्कर क्यो क्यो है
दोस्तो हमारे कान की सरंचना टेडी मेड़ी होती है जिसमे नलिकायें होती है इन नालिकयो मे लिक्विड भरा होता है
जब हम झूले पर गोल गुमने के बाद अचानक रुक जाते है तब ये कुछ देर तक घूमता रहता है जिसके कारण हमें चक्कर आते है जब यह द्रव घूमना बंद हो जाता है तब हमारा दीमक सामान्य इस्थिति में आ जाता है
आकिर चक्कर क्यो क्यो है
दोस्तो हमारे कान की सरंचना टेडी मेड़ी होती है जिसमे नलिकायें होती है इन नालिकयो मे लिक्विड भरा होता है
जब हम झूले पर गोल गुमने के बाद अचानक रुक जाते है तब ये कुछ देर तक घूमता रहता है जिसके कारण हमें चक्कर आते है जब यह द्रव घूमना बंद हो जाता है तब हमारा दीमक सामान्य इस्थिति में आ जाता है
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