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सैटेलाइट क्या है और कैसे काम करता है? | Satellite in Hindi
Satellite क्या है (Satellite in Hindi).
हेलो दोस्तो अपने सैटेलाइट के बारे में तो आपने जरुर सुना होगा और अपने tv न्यूज़ में अक्सर सैटेलाइट लांचिंग के वीडियो भी देखे होंगे जिन्हें बहुत सारी एजेंसिया जैसे नासा या इसरो के द्वारा लॉन्च किया जाता है इनके अलावा और भी एजेंसिया है जो सैटेलाइट लांचिंग करती है पर दोस्तो क्या अपने कभी सोचा कि आखिर ये सैटेलाइट क्या हैं और आखिर ये स्पेस में सैटेलाइट कैसे उड़ते हैं और इन सैटेलाइट का काम क्या है
आज इन्ही सवालों के जवाब के साथ आपको youfo पर यह खास लेख पढ़ने को मिलेगा
आज के इस लेख में हम आपको बतायंगे की सैटेलाइट क्या होता है, और सैटेलाइट कैसे काम करता है, सैटेलाइट के कितने प्रकार होते है तो सबसे पहले जानते है कि आकिर सैटेलाइट क्या हैं
Satellite क्या है? – What is Satellite in Hindi
दोस्तो सैटेलाइट स्पेस में रहने वाली उस वस्तु को कहते हैं जो किसी तारे या ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगता है उसे सैटेलाइट (उपग्रह) कहते है ये प्राकृतिक और कृत्रिम भी हो सकते है
प्राकृतिक सेटेलाईट
प्राकृतिक satellite जैसे चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगता है तो यह पृथ्वी का satellite है, और पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगती है तो यह सूर्य का satellite है.
कृत्रिम सेटेलाइट
कृत्रिम सेटेलाइट जैसे International Space Station (ISS) एक artificial satellite है जो पृथ्वी की परिक्रमा करता है.
जैसा की आप जानते है कि हमारे सौर मंडल में दर्जनों प्राकृतिक उपग्रह हैं जो किसी ग्रह का चक्कर लगते है वहीं हमारे द्वारा बनाई गई
artificial satellites जो हजारों की संख्या में
है और ये पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं. इनमे से कुछ satellites पृथ्वी की फोटो लेते हैं तो कुछ मौसम के बारे में जानकारी देते है
जबकि हमारे कुछ और सैटेलाइट्स दूसरे ग्रहों, सूर्य, ब्लैक होल्स और आकाश गंगाओं की फोटो लेते रहते हैं. इन photo की मदद से हमारे वैज्ञानिकों को सौरमंडल और ब्रह्मांड को समझने में मदद मिलती है. चलो दोस्तो हम आगे बढ़ते हौ और जानते है कि आखिर सेटेलाइट कैसे काम करता है
Satellite कैसे काम करता है?
हेलो दोस्तो जैसा कि आप जानते है कि किसी भी इलेट्रॉनिक डिवाइस में बहुत सारे छोटे छोटे कॉम्पोनेंट्स लगे होते है जिनकी मदत से वह डिवाइस अच्छी तरह से काम कर पाता उसी तरह सेटेलाइट में भी बहुत सारे छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स लगे होते है जैसे ट्रांसपोंडर, एंटीना आदि लगे होते हैं जिनकी वजह से सेटलाइट काम करता है यह इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट्स पृथ्वी से आने वाले सिंग्नल की शक्ति को बहुत ही ज्यादा बढ़ा देते हैं। और बाद में रिसीवर को भेज देते हैं। इन सभी कामो को करने के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है जो सेटेलाइट में लगे सोलर पैनल और बैटरीयों की मदत से पूरी हो जाती है और दोस्तो एक satellite को इस तरह से बनाया जाता है की उस पर अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण औररेडिएशन और अत्यधिक तापमान में सेटेलाइट बिना रुके काम कर सके और इसके साथ ही सैटेलाइट हल्का होना भी बहुत जरूरी होता हैक्योंकि लॉन्चिंग का खर्च satellite के वजन पर ही निर्भर करता है औऱ satellite हल्के और मजबूत धातु से बना होना चाहिए क्योकि स्पेस में सेटेलाइट को दुबारा ठीक नही क्या जा सकता है
Satellite बीना ईंधन के कैसे चलते है?
दोस्तो जैसा कि आपको पता है कि उपग्रह, ग्रहों के चक्कर लगते है यह संभव हो पाता है गुरुत्वाकर्षण की सहायता से, इसकी मदत से वह अपनी कक्षा में चक्कर लगते है जिसके पतलब है कि उपग्रह को ग्रहों की चक्कर के लिए किसी ऊर्जा की आवश्कता नही होती है
लेकिन सेटेलाइट को सिंगनल को भेजने और रिसीव करने के लिए ऊर्जा की आवश्कता होती है जो सेटेलाइट में लगे बड़े-बड़े सौर पेनलो और बैटरियों की मदत से पूरा हो जाता है
Satellite अंतरिक्ष में कैसे टिका रहता है?
हेलो दोस्तो तो अब हम आपको बताएंगे कि सेटेलाइट आकिर अंतरिक्ष टिका कैसे रहता है
जैसा कि आप जानते है satellites रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाता है.
Satellite तभी पृथ्वी की चक्कर लगता है जब उसकी स्पीड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की वजह से संतुलित होती है चलो में आपको इसको एक उदाहरण के साथ समझते है आप एक धागे को एक पत्थर में बांधे और उसे घुमाए तो आप देखते है कि पत्थर एक सर्कल में एक जगह घूमता है ऐसा हो पाता है इस धागे के कारण उसी तरह पृथ्वी की ग्रेविटी सेटेलाइट को अपने तरफ खिंचती है और सेटेलाइट इस तरह अपने सर्कल में घूमती रहती है बिना ग्रेविटी के satellite अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा में उड़ सकता है सैटेलाइट्स अलग-अलग ऊँचाइयों पर अलग-अलग स्पीड में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं
अब हम आपको बताते है कि कौन कौन सी उचाई पर और कौन सी orbits में परिक्रमा करते हैं
Low-Earth Orbit यह ऑर्बिट पृथ्वी के धरातल से 160 से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. इस ऑर्बिट में ही अधिकतर human missions को पूरा किया जाता है और International Space Station भी इसी ऑर्बिट में परिक्रमा करता है.
Geostationary Orbit: यह पृथ्वी के धरातल से 35,786 km ऊपर होता है इसमें ज्यादतर कम्युनिकेशन सैटेलाइट होती है
Polar Orbit: जिसकी ऊंचाई पृथ्वी के तल से 200 से 1000 किलोमीटर के बीच होती है. इस ऑर्बिट में मौसम सैटेलाइट और सैनिक परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले सैटेलाइट होती
Satellites कितने प्रकार के होते हैं? – Types of Satellites in Hindi
हैलो दोस्तो अब हम जान लेते है कि आखिर सेटेलाइट कितने प्रकार की होती है जैसा कि आप जानते है कि सेटेलाइट दो प्रकार की होती है प्राकृतिक और कृत्रिम सैटेलाइट्स लेकिन आज हम बात artificial सेटेलाइट के बारे में जो 11 प्रकार के होते हैं तो चले जानते है इनके बारे मे
1. Weather Satellites: इस सेटेलाइट का प्रयोग पृथ्वी पर मौसम और जलवायु की निगरानी के लिए किया जाता है.
2. Killer Satellites: किलर सेटेलाइट का इस्माल दुश्मनो की सेटेलाइट और उनके हथियार को तबाह करने के लिए किया जाता है
3. Astronomical Satellites: ये वे सैटेलाइट्स हैं जिनका इस्तेमाल दूर स्थित ग्रहों, ब्रह्मांड और अन्य बाहरी अंतरिक्ष वस्तुओं के अध्ययन के लिए किया जाता है.
4. Space Based Solar Power Satellites: इस satellites का इस्तेमाल सूर्य से ऊर्जा लेकर उसे पृथ्वी या अन्य किसी जगह इस्तेमाल के लिए लिए किया जाता है.
5. Space Stations: इस सेटेलाइट का प्रयोग इंसानों के बाहरी अंतरिक्ष में रुकने के लिए किया जाता है.
6. Bio Satellites: इन सैटेलाइट्स में जीवों पर वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए किया जाता है
8. Crewed Spacecraft: ये बड़े satellites होते हैं जो मानव को orbit या इससे आगे छोड़ने और उन्हें वापस लाने में सक्षम होते हैं.
Satellites का उपयोग कहां-कहां किया जाता है?
आखिर सेटेलाइट के उपयोग कौन कौन से जान लेते है
• सैटेलाइट प्रयोग सैन्य कार्यों में भी किया जाता है जो दुश्मन की हर गतिविधि और सैन्य ठिकानों पता लगाने में सैटेलाइट का प्रयोग किया जाता है
• सैटेलाइट्स का प्रयोग tv signals को ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है
• सैटेलाइट का इस्तेमाल मोबाइल कम्युनिकेशन के लिए भी किया जाता है क्योंकि जहां वायर पहुंच नही सकते है वँहा signals satellites के जरिए भेजे जाते है
• Navigation के लिए satellites का प्रयोग किया जाता है (GPS). जिससे mobile और कार में location पता करने के लिए किया जाता है.
• सैटेलाइट का इस्तेमाल दूर स्थित ग्रह ब्रह्मांड और भी अन्य अंतरिक्ष चीजों का जैसे ब्लैक होल व्हाइट होल पता लगाने के लिए सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है
• मौसम वैज्ञानिक, सैटेलाइट्स का इस्तेमाल मौसम का पता लगाने के लिए करते हैं. जो बारिश, तूफान इत्यादि के बारे में पहले ही मौसम वैज्ञानिको को जानकारी दे देते हैं.
• पर्यावरण और जलवायु की निगरानी के लिए satellites का प्रयोग किया जाता है.
• Earth Observation Satellites की मदत से समुद्र की हवाओ और की लहरों पर नजर रखी जा सकती है.
• सैटेलाइट्स का इस्माल भूमिगत पानी और खनिज स्त्रोतों का पता लगने के लिए भी किया जाता है
एक उपग्रह (satellite) को दूसरे उपग्रह से टकराने से कैसे रोका जाता है?
अबतक मेने आपको सेटेलाइट के बारे में इतनी सारी जानकारी दी लेकित अभी भी बहुत सारी चीजें है जो सेटेलाइट हमारे लिये इतनी खास होती चलिए अब बात करते है कि सेटेलाइट को एक दूसरे से टकराने से कैसे बचाते है पृथ्वी की कक्षा में अभी के टाइम 5 लाख से भी ज्यादा आर्टिफीशियल सैटेलाइट्स मौजूद हैं जो पृथ्वी का चक्कर लगाते है इनमे से कुछ सेटेलाइट जो उपयोग के लायक भी नही रहे जिसकी वजह से
अंतरिक्ष में बहुत सारा कबाड़ भी तैर रहा है ऐसे में अगर कोई नई सेटेलाइट को कक्षा (orbit) छोड़ा जाता है तब टकराव का जोखिम बना रहता है सेटेलाइट को टकराने से बचने के लिए कुछ एजेंसियां होती है जो स्पेस की कचड़े पर नजर रखती है जैसे कि United State Space Surveillance Network, यह एजेन्सी स्पेस के कचरे पर पृथ्वी से नजर रखती हैं. अगर कोई टुकड़ा किसी जरुरी वस्तु से टकराने का होता है तो यह एजेंसी space agencies बताती है इस तरह से एक सेटेलाइट को बचाया जाता है
Satellite Phone क्या है?
चलो दोस्तो अब हम बात कर लेते है सेटेलाइट फ़ोन के बारे में सेटेलाइट फ़ोन उन फोन को कहा जाता है जो फोन अपने सिग्नल को स्पेस में सेटेलाइट को सिंग्नल भेजता है और आने वाले सिग्नल को रिसीव कर लेता है उसे सैटेलाइट फोन कहते है । जबकि आम फोन सिग्नल को भेजने या रिसीव करने के लिए टावर का प्रयोग करता है जिसकी रेंज बहुत कम होती है और सेटेलाइट फोन में कोई सिमित दायरा नहीं है जिसकी वजह से इसे पृथ्वी के किसी भी जगह से इस्तेमाल में लाया जा सकता है
सैटेलाइट फोन इतने महंगे क्यो आते हैं?
जैसा जी दोस्तो हमने आपको ऊपर वाले लेख में बताया कि सेटेलाइट फोन आम फ़ोन की तरह
टावर का प्रयोग नही करता है सेटेलाइट फोन खुद एक टावर का काम करता है इनकी रेंज बहुत ज्यादा होती है इन्ही सब वजहों के कारण ये फोन इतने महंगे होते है और इनका रिचार्ज बहुत महंगा होता है क्यो की आप किसी भी जगाह से डारेक्ट आप सेटेलाइट से कनेक्ट कर पाते है इस फोन पर एक मिनट काल करने के 20 से भी ज्यादा चार्ज होता है आप इसे अपने निजी काम के लिए प्रयोग में नही ले सकते है
अगर आप इसे कंही विदेश से लाते है तो यह फोन एयरपोर्ट पर ही जब्त कर लिया जाएगा
Conclusion
दोस्तो अगर आपको मेरा यह लेख “Satellite क्या है और कैसे काम करता है?” पसंद है तो कृपया इसे दूसरे social media networks जैसे whatsapp, facebook, telegram इत्यादि पर share जरूर करें.
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